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राहुल और तेजस्वी की रैली में रेवंत रेड्डी के बाद तमिल नाडू के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भाग लिया है। कर्नाटका के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया भी शामिल होने वाले हैं। बिहार में मज़बूत हो रहा यह चुनावी गठजोड़ उत्तर बनाम दक्षिण की बहस को भी एक नए चश्मे से देखने का मौक़ा दे रहा है। स्टालिन का बिहार आना इंडिया गठबंधन की एकजुटता का संदेश तो है ही मगर बिहार के उस समृद्ध और समावेशी इतिहास की याद भी दिलाता है जिसमें सिर्फ़ बिहारी ही नहीं, देश के अन्य इलाक़ों से आए नेताओं को भी अपनी ज़मीन मिली। आम तौर पर उत्तर भारत के नेताओं के दक्षिण में दिए भाषणों का अनुवाद स्थानीय भाषाओं में होता है। आज मुज़फ़्फ़रपुर के मंच पर स्टालिन ने अपना भाषण तमिल में दिया जिसका अनुवाद हिंदी में किया गया। स्टालिन बिहार आए थे, उस राज्य में जिसके लाखों लोगों ने तमिल नाडू की ज़मीन को अपने श्रम से सींचा है।
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