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Shankaracharya Avimukteshwaranand Controversy Decoded: Prayagraj Clash, Tradition vs Authority
Decode With Sudhir Chaudhary : A major controversy has erupted over Shankaracharya Avimukteshwaranand following events at Prayagraj’s Sangam. The dispute began on Mauni Amavasya after a clash between his disciples and the local administration. Questions are now being raised over religious traditions, public order, and the use of the Shankaracharya title. The issue has taken a political turn as legal and administrative scrutiny intensifies.
Decode With Sudhir Chaudhary : हमारे देश में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर पिछले कुछ दिनों से काफी विवाद हो रहा है और अब उनके शंकराचार्य होने पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आज हम इस पूरे विवाद को DECODE करेंगे। इस विवाद की शुरूआत, 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन हुई। जब प्रयागराज में संगम तट पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिष्यों के साथ अखाड़े से पालकी में सवार होकर स्नान के लिए पहुंचे। उनका आरोप है कि पुलिसवालों ने उनके शिष्यों के साथ मारपीट की और कई शिष्यों को हिरासत में लिया। जबकि प्रशासन का कहना है कि उनके शिष्यों ने वहां की बैरिकेटिंग तोड़ दी और पालकी सहित संगम तक जाने की जिद करने लगे। उस समय वहां भीड़ काफी ज्यादा थी और पुलिस के बार-बार समझाने पर भी, जब शंकराचार्य और उनके शिष्य नहीं माने तो पुलिस ने उनको पालकी सहित संगम तट से हटाकर कुछ दूर कर दिया। इसके बाद उन्होंने स्नान करने से मना कर दिया और धरने पर बैठ गए हैं, उनकी मांग है कि प्रशासन उनसे माफी मांगे। अब वो लगातार मीडिया से बात कर रहे हैं, प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं और पुलिस, प्रशासन और उत्तर प्रदेश सरकार पर कई आरोप लगा रहे हैं। एक तरह से प्रयागराज के संगम तट पर शंकराचार्य का शिविर, अब एक राजनीतिक अखाड़ा बन गया है। अब सवाल ये उठता है कि क्या वो पैदल संगम तट तक नहीं जा सकते थे? और क्या पालकी पर जाना कोई सनातन परंपरा है? देश के पहले शंकराचार्य, -आदि शंकराचार्य- ने तो पैदल चलकर ही पूरे देश में सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार किया था। ऐसे में अगर मौनी अमावस्या के दिन, शंकराचार्य पैदल ही स्नान के लिए जाते, तो शायद ये विवाद नहीं होता, लेकिन वो अपनी जिद पर अड़े रहे। आखिर उन्होंने ऐसा क्यों किया, अब आप उनका पक्ष सुनिए। लेकिन अब अविमुक्तेश्वरानंद के अपने नाम के साथ शंकराचार्य के इस्तेमाल को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है। प्रयागराज के मेला प्राधिकरण ने उन्हें नोटिस जारी करके उनसे अपने नाम के पहले शंकराचार्य शब्द के इस्तेमाल करने पर 24 घंटे में जवाब मांगा था। ये नोटिस 19 जनवरी को भेजा गया था। इसमें लिखा है कि ज्योतिर्मठ पीठ के शंकराचार्य के पद को लेकर विवाद है और ये मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। ऐसे में वो खुद को शंकराचार्य कैसे बता रहे हैं ? इस नोटिस का शंकराचार्य ने जवाब दिया है, उनके मुताबिक नोटिस मनमाना और दुर्भावनापूर्ण है.
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