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भोंदू की सच्ची और निष्कपट भक्ति देखकर स्वयं ठाकुर जी उसके सामने सखा बनकर आ गए। मंद-मंद मुस्कान, हाथ में वंशी और गायों के साथ जब ठाकुर जी भोंदू की ओर बढ़े, तो भोंदू प्रेम और भाव से कांप उठा। 🥹🙏
भोंदू अपना नाम तक भूल गया और बोला—“सब मुझे प्रेम से भोंदू बुलाते हैं।” ठाकुर जी भी उसका नाम सुनकर हँस पड़े और फिर प्रेम से बोले—“चल, कुछ खवा मोको… भूख लगी है।” ❤️
भोंदू के पास सिर्फ दो रोटियाँ, थोड़ी मिर्च और गुड़ था—एक रोटी ठाकुर जी को दी और एक अपने लिए रख ली। यही तो सच्ची भक्ति है… जहाँ भोजन छोटा हो सकता है, लेकिन प्रेम कभी छोटा नहीं होता। 🌸
🙏 जय श्री ठाकुर जी
❤️ राधे राधे
✨ सच्चे प्रेम से ठाकुर जी को पुकारिए, वे अपने भक्त से मिलने जरूर आते हैं।