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बैटल ऑफ लोंगेवाला में भारतीय सेना की जीत की कहानी लांसनायक भैरों सिंह राठौड़ के जिक्र के बिना अधूरी है. शायद यही वजह है कि युद्ध के बाद लांसनायक भैरों सिंह राठौड़ को ‘हीरो ऑफ लोंगेवाला’ के रूप में नई पहचान मिली थी। इस युद्ध में शेरगढ़ के सूरमा भैरोसिंह ने एमएफजी से करीब 30 पाकिस्तानी दुश्मनों को ढेर किया था।
बात हैं 06 दिसंबर 1971 की है, जब शाम करीब सात बजे T-59 टैंक रेजिमेंट के साथ पाक सेना ने राजस्थान बार्डर पर स्थिति लोंगेवाला पोस्ट पर हमला बोल दिया था. उस समय पाक सेना के सामने लोंगेवाला पोस्ट पर मौजूद भारतीय जवानों की संख्या भले ही मुट्ठी भर भी न थी, पर हौसला आसमान से भी ऊंचा था. लांस नायक भैरों सिंह राठौड़ के नेतृत्व में भारतीय जांबाजों की टुकड़ी दुश्मन का पूरी बहादुरी के साथ सामना कर रही थी।
आमने-सामने की गोलीबारी के बीच दुश्मन की बंदूक से निकली एक गोली लांसनायक भैरों सिंह के साथी सिपाही को भेदती हुई निकल गई और उनका साथी सिपाही वीरगति को प्राप्त हो गया।
साथी सिपाही की शहादत देख लांसनायक भैरों सिंह का खून कुछ इस तरह खौला कि उन्होंने अपने हाथ में लाइट मशीनगन उठाई और ‘विजय या वीरगति’ के जयघोष के साथ गोली बरसाते हुए दुश्मन की तरफ बढ़ चले।
देखते ही देखते लांसनायक भैरों सिंह ने दुश्मन की फारवर्ड लाइन को ला’शों के ढेर में तब्दील कर दिया। उन्होंने 30 से ज़्यादा पाकिस्तानी सैनिकों को ढेर कर दिया।
लोंगेवाला के साथ शाहगढ़ में भी दिखाया था अद्भुत शौर्य:
भारत-पाकिस्तान के बीच लड़े गए 1971 के युद्ध में लांस नायक भैरों सिंह ने न केवल लोंगेवाला बल्कि शाहगढ़ की लड़ाई में भी अद्भुत शौर्य का परिचय दिया था. बीएसएफ के दस्तावेजों में दर्ज इबारत को पढ़ें तो उसमें लिखा है कि बैटल ऑफ लोंगेवाला और बैटल ऑफ शाहगढ में लांसनायक भैरों सिंह की भूमिका किसी हीरो की तरह थी. उनकी इसी बहादुरी को फिल्म बार्डर में बेहतरीन तरीके से प्रदर्शित किया गया है. इस फिल्म में लांसनायक भैरों सिंह की भूमिका अभिनेता सुनील शेट्टी ने अदा की थी।
1971 के भारत-पाकिस्तान के युद्ध के बाद लांसनायक भैरों सिंह राठौड़ को नायक के पद पर पदोन्नत कर दिया गया था. साथ ही, 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अदम्य साहस और असाधारण वीरता का परिचय देने वाले भैरों सिंह राठौड़ को सेना मेडल से सम्मानित किया गया था।🇮🇳🇮🇳💐💐
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