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जगन्नाथ मंदिर की घंटियाँ बज रही थीं। छोटा सा बालक अर्जुन हाथ जोड़कर बोला, “हे प्रभु, मेरे पिताजी की तबीयत ठीक कर दो।” डॉक्टरों ने उम्मीद छोड़ दी थी। अर्जुन रोज मंदिर आकर रोते हुए प्रार्थना करता। एक रात अर्जुन ने सपना देखा — भगवान जगन्नाथ मुस्कुराते हुए बोले, “डर मत, मैं तेरे साथ हूँ।” सुबह अचानक उसके पिताजी की तबीयत में सुधार होने लगा। डॉक्टर हैरान रह गए। अर्जुन खुशी से मंदिर भागा और बोला — “जय जगन्नाथ!” घंटी और शंख की आवाज़ के बीच मंदिर में एक दिव्य प्रकाश फैल गया। सीख: सच्ची श्रद्धा कभी व्यर्थ नहीं जाती।
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