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नोट: जिस समय यह वीडियो अपलोड किया गया था उस समय तक इस घटना पर प्रधानमंत्री की टिप्पणी नहीं आई थी। इसलिए हम इस बात को अपनी रिपोर्ट में शामिल नहीं कर पाए।
हमारे वीडियो रिकार्ड करने के बाद इस मामले में दो बड़ी ख़बर आ चुकी है। सुप्रीम कोर्ट के बार संघ ने चीफ जस्टिस की तरफ जूता फेंकने का प्रयास करने वाले वकील को बार की सदस्यता से निलंबित कर दिया है। चीफ जस्टिस की ओर जूता फेंकने का प्रयास सामान्य घटना नहीं है। इस घटना की ख़बर आते ही विपक्ष के नेताओं के बयान आने लगे थे। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी, कपिल सिब्बल, केरला और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने निंदा की लेकिन सरकार की तरफ से कोई बयान नहीं आया। शाम छह बजे जब हम इस वीडियो के लिए रिकार्ड कर रहे थे तब तक कानून मंत्री, गृह मंत्री, प्रधानमंत्री का बयान नहीं आया था। प्रधानमंत्री का बयान रात पौने नौ बजे आया। सरकार इस घटना की गंभीरता को समझने में चूक गई। क्या इसलिए कि सोशल मीडिया पर चीफ जस्टिस को टारगेट करने वाले उसके समर्थक हैं? आई टी सेल से जुड़े हैं? अदालत और पुलिस ने इस मामले में उदारता का प्रदर्शन किया है लेकिन हमें यह समझना होगा कि वह कौन सा अधिकार बोध है जिसके तहत कोई वकील चीफ जस्टिस पर हमला करने की कोशिश करता है। आप अदालत की चुप्पी के पीछे राजनैतिक और वैचारिक पक्ष को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते हैं। क्या हम मान लें कि धर्म की सर्वोच्चता के आगे संवैधानिक सर्वोच्चता कमज़ोर पड़ने लगी है। उम्मीद है आप यह वीडियो पूरा देखेंगे।
नोट- आज कल AI के इस्तेमाल से मेरी आवाज़ और तस्वीर का इस्तेमाल कर कई सारे चैनल बना दिए गए हैं। लेकिन इनमें से कोई भी मेरा चैनल नहीं है। प्लीज़ आप सतर्क हो जाएं। मेरे तीन ही चैनल हैं जिनके लिंक यहां दे रहा हूँ।
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