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इस्राईल की संसद में प्रधानमंत्री मोदी का भाषण भारत और उनके लिए बड़ा मौका था। ट्रंप और उनकी धमकी भरी नीतियों के बाद की दुनिया में अपना ख़ाका खींचने का। आपको याद होगा कि विश्व आर्थिक फोरम में कनाडा के प्रधानमंत्री कार्नी का भाषण ऐतिहासिक माना गया। उन्होंने ट्रंप की नीतियों के दुष्प्रभाव की खुलकर आलोचना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह मौका चूक गए। अगर उन्होंने साफ साफ ग़ज़ा में हुए नरसंहार की बात की होती तो उनका भाषण युगांतकारी माना जाता लेकिन गोदी मीडिया जितना भी बड़ा बना ले यह भाषण रुटीन से ज़्यादा कुछ भी नहीं है। उम्मीद है आप हमारा यह विश्लेषण पूरा देखेंगे।
नोट- आज कल AI के इस्तेमाल से मेरी आवाज़ और तस्वीर का इस्तेमाल कर कई सारे चैनल बना दिए गए हैं। लेकिन इनमें से कोई भी मेरा चैनल नहीं है। प्लीज़ आप सतर्क हो जाएं। मेरे तीन ही चैनल हैं जिनके लिंक यहां दे रहा हूँ।
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